लेह की आबो-हवा में घुला ओजोन का जहर, दमोह देश में सबसे साफ; पढ़ें वायु गुणवत्ता की पूरी रिपोर्ट
"प्रदूषण के उतार-चढ़ाव के बीच लेह में वायु गुणवत्ता का स्तर खतरनाक मोड़ पर पहुंचा, जबकि दमोह ने शुद्ध हवा की मिसाल पेश की।"
देश भर में वायु गुणवत्ता का स्तर पल-पल करवट बदल रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के विश्लेषण से चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। पर्वतीय पर्यटन स्थल लेह में अचानक वायु प्रदूषण का स्तर बढ़कर खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है, वहीं मध्य प्रदेश का दमोह देश का सबसे साफ हवा वाला शहर बनकर उभरा है।
लेह और दमोह के बीच वायु प्रदूषण का अंतर इतना अधिक है कि लेह की स्थिति दमोह की तुलना में लगभग 17.6 गुना अधिक खराब दर्ज की गई है।
लेह में 95 अंकों की भारी उछाल, ओजोन का प्रकोप हावी
आंकड़ों के अनुसार, लेह देश का सबसे प्रदूषित शहर दर्ज किया गया। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 पर पहुंच गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है।
एक ही दिन में बड़ा उछाल: पिछले दिन लेह का AQI 205 था, जिसमें महज 24 घंटों के भीतर 95 अंकों की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
ओजोन की अधिकता: लेह की हवा में ओजोन (Ozone) गैस पूरी तरह हावी पाई गई है, जो सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
WHO मानकों का उल्लंघन: लेह में प्रदूषण का यह स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा तय की गई सुरक्षित सीमा से 550 प्रतिशत अधिक है।
दमोह की हवा सबसे शुद्ध, भिवाड़ी में बड़ा सुधार
एक तरफ जहां लेह में स्थिति चिंताजनक है, वहीं मध्य प्रदेश के दमोह में वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 17 रिकॉर्ड किया गया, जो इसे देश का सबसे स्वच्छ शहर बनाता है।
राजस्थान के भिवाड़ी में राहत की सांस ली गई है। पिछले दिन 214 AQI के साथ सबसे प्रदूषित रहने वाला भिवाड़ी, आज 120 अंकों के जबरदस्त सुधार के साथ 94 के स्तर पर आ गया है। इसके साथ ही वहां की हवा 'खराब' से 'संतोषजनक' श्रेणी में लौट आई है।
दिल्ली-एनसीआर और अन्य प्रमुख महानगरों का हाल
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के शहरों में प्रदूषण के स्तर में हल्का सुधार और स्थिरता देखी गई है:
| शहर | वर्तमान AQI | स्थिति / श्रेणी | बदलाव (24 घंटे) |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | 94 | संतोषजनक | 4 अंकों का सुधार |
| फरीदाबाद | 110 | मध्यम | 13 अंकों का सुधार |
| नोएडा | 140 | मध्यम | - |
| ग्रेटर नोएडा | 126 | मध्यम | - |
| गाजियाबाद | 99 | संतोषजनक | - |
| मुंबई | 39 | बेहतर (साफ) | - |
| जयपुर | 61 | संतोषजनक | - |
| लखनऊ | 63 | संतोषजनक | - |
दिल्ली का वार्षिक ट्रेंड: साल 2026 में दिल्ली का सबसे साफ दिन 9 जुलाई (AQI 48) दर्ज किया गया था, जबकि सबसे प्रदूषित दिन 18 जनवरी (AQI 440) रहा था।
देश के 10 सबसे प्रदूषित शहर
देश भर के 10 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में हरियाणा के 4 शहर शामिल हैं:
लेह - 300 (खराब)
पानीपत - 263 (खराब)
खन्ना - 174 (मध्यम)
जींद - 165 (मध्यम)
मोदीनगर - 147 (मध्यम)
नोएडा - 140 (मध्यम)
कटक - 137 (मध्यम)
हिसार - 134 (मध्यम)
मंडी गोबिंदगढ़ - 133 (मध्यम)
अंबाला - 130 (मध्यम)
राष्ट्रीय परिदृश्य: देश भर के 233 शहरों की स्थिति
सीपीसीबी द्वारा 233 शहरों के विश्लेषण में देश की कुल स्थिति का लेखा-जोखा इस प्रकार है:
29.2% शहर (68 शहर): हवा 'बेहतर/साफ' (AQI 0-50)। उदाहरण: दमोह, मुंबई, चंडीगढ़, भोपाल, इंदौर, श्रीनगर, देहरादून, ग्वालियर।
57.5% शहर (134 शहर): हवा 'संतोषजनक' (AQI 51-100)। उदाहरण: दिल्ली, जयपुर, लखनऊ, बेंगलुरु, कोलकाता, हैदराबाद, गाजियाबाद।
12.4% शहर (29 शहर): हवा 'मध्यम' श्रेणी में (AQI 101-200)। उदाहरण: फरीदाबाद, नोएडा, जींद, हिसार, चेन्नई।
0.9% शहर (2 शहर): हवा 'खराब' श्रेणी में (AQI 201-300)। इसमें केवल लेह (300) और पानीपत (263) शामिल हैं।
प्रमुख प्रदूषक तत्व (Pollutants)
पानीपत, जींद, फरीदाबाद और गया जैसे शहरों में PM2.5 के बारीक कण हवा को जहरीला बना रहे हैं। वहीं लेह, नोएडा, अंबाला, कटक और ग्रेटर नोएडा में PM10 की अधिकता के कारण धुंध और प्रदूषण बना हुआ है।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) का मानक पैमाना
हवा की शुद्धता और उससे सेहत पर पड़ने वाले प्रभाव को मापने के लिए AQI को इन 6 श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
| AQI सीमा | श्रेणी | स्वास्थ्य पर प्रभाव |
|---|---|---|
| 0 - 50 | बेहतर (Good) | न्यूनतम या कोई प्रभाव नहीं |
| 51 - 100 | संतोषजनक (Satisfactory) | संवेदनशील लोगों के लिए हल्की सांस की समस्या |
| 101 - 200 | मध्यम (Moderate) | फेफड़े व हृदय रोगियों को सांस में असुविधा |
| 201 - 300 | खराब (Poor) | लंबे समय तक संपर्क में रहने पर सांस की बीमारी |
| 301 - 400 | बेहद खराब (Very Poor) | गंभीर श्वसन रोगों का खतरा |
| 401 - 500 | गंभीर (Severe) | स्वस्थ व्यक्तियों पर बुरा असर, बीमारों के लिए घातक |
निष्कर्ष
समग्र आंकड़ों से स्पष्ट है कि देश के अधिकांश शहरों (लगभग 86.7%) में हवा वर्तमान में सांस लेने योग्य यानी 'साफ' से लेकर 'संतोषजनक' बनी हुई है। हालांकि, लेह और पानीपत जैसे क्षेत्रों में अचानक बढ़ा प्रदूषण स्थानीय प्रशासन और नीति निर्माताओं के लिए पर्यावरण सुरक्षा के ठोस कदम उठाने का स्पष्ट संकेत है।