हरित हाइड्रोजन और LOHC तकनीक: वैश्विक ऊर्जा संकट का समाधान और संतुलन की चुनौती

26 Sep 2026
हरित हाइड्रोजन और LOHC तकनीक: वैश्विक ऊर्जा संकट का समाधान और संतुलन की चुनौती

स्वच्छ ऊर्जा के नए युग में हाइड्रोजन की बढ़ती मांग, लिक्विड ऑर्गेनिक हाइड्रोजन कैरियर (LOHC) की भूमिका और वैश्विक सामाजिक-आर्थिक संतुलन की आवश्यकता पर एक विशेष विश्लेषण।

 

 

दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा की मांग जिस गति से बढ़ रही है, उसने हाइड्रोजन को भविष्य के सबसे महत्त्वपूर्ण और बहुआयामी ऊर्जा स्रोत के रूप में स्थापित कर दिया है। उद्योग, भारी परिवहन और विद्युत उत्पादन जैसे क्षेत्रों में डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन कम करने) के लिए हाइड्रोजन एक आदर्श विकल्प बनकर उभरा है। वर्ष 2024 तक वैश्विक स्तर पर हाइड्रोजन की मांग लगभग 10 करोड़ टन तक पहुँच चुकी है, जो एक दशक पहले की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत अधिक है।

हालाँकि, इस कुल उत्पादन में कम उत्सर्जन वाले (लो-एमिशन) हाइड्रोजन की हिस्सेदारी वर्तमान में 1 प्रतिशत से भी कम है। आने वाले वर्षों में 'ग्रीन हाइड्रोजन'—जिसका उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन आदि) के माध्यम से होता है—की मांग में अत्यधिक तीव्र वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। हाल ही में केमिकल इंजीनियरिंग पत्रिका में प्रकाशित एक वैश्विक अध्ययन में इसके विभिन्न पहुलओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है।

परिवहन और भंडारण: सबसे बड़ी तकनीकी बाधा

ग्रीन हाइड्रोजन के व्यापक उपयोग के मार्ग में सबसे बड़ी चुनौती इसका भंडारण (Storage) और परिवहन (Transport) है। अत्यंत हल्की गैस होने के कारण हाइड्रोजन सामान्य तापमान और दबाव पर काफी अधिक स्थान घेरती है। इसे लंबी दूरी तक या एक देश से दूसरे देश तक सुरक्षित और किफायती तरीके से पहुँचाना बेहद जटिल और खर्चीला काम है।

इस समस्या के व्यावहारिक समाधान के रूप में लिक्विड ऑर्गेनिक हाइड्रोजन कैरियर (LOHC - Liquid Organic Hydrogen Carrier) तकनीक को अत्यंत संभावनाशील माना जा रहा है।

कैसे काम करती है LOHC तकनीक?

हाइड्रोजनेशन (Hydrogenation): उत्पादन स्थल पर हाइड्रोजन को एक विशेष जैविक तरल पदार्थ (Organic Liquid Carrier) के साथ रासायनिक प्रक्रिया द्वारा जोड़ा जाता है।

सुरक्षित परिवहन: इस प्रक्रिया के बाद बना तरल पदार्थ सामान्य क्रूड ऑयल या डीजल की तरह ही व्यवहार करता है। इसे मौजूदा जहाजों, टैंकरों और पाइपलाइनों के माध्यम से आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है।

डीहाइड्रोजनेशन (Dehydrogenation): गंतव्य स्थल पर एक अन्य रासायनिक प्रक्रिया के ज़रिए हाइड्रोजन को कैरियर लिक्विड से अलग कर लिया जाता है।

पुनर्चक्रण (Recycling): हाइड्रोजन मुक्त होने के बाद खाली हुए कैरियर लिक्विड को वापस उत्पादन केंद्र भेज दिया जाता है, जहाँ इसका उपयोग बार-बार किया जा सकता है।

बास्क देश विश्वविद्यालय (EHU) का यूरोपीय अध्ययन

LOHC आधारित हाइड्रोजन आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) के सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक प्रभावों का आकलन करने के लिए बास्क देश विश्वविद्यालय (EHU) की सुप्रैन (Supren) शोध टीम ने UnLOHCked नामक यूरोपीय परियोजना के तहत एक व्यापक अध्ययन किया है।

शोधकर्ताओं ने प्रमुख निर्यातक और आपूर्तिकर्ता देशों तथा संभावित उपभोक्ता (आयातक) देशों के बीच के व्यापारिक मॉडलों का गहन विश्लेषण किया:

उत्पादक एवं निर्यातक देश: नामीबिया, सऊदी अरब, नॉर्वे और स्पेन।

उपभोक्ता एवं आयातक देश: जर्मनी, नीदरलैंड, जापान और इटली।

अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष

पहलूविश्लेषण एवं चुनौतियाँ
कोई सार्वभौमिक मॉडल नहींऐसा कोई एकल व्यापारिक मॉडल नहीं है जो सभी मापदंडों पर सही उतरे। जहाँ लागत कम है, वहाँ पर्यावरणीय या सामाजिक जोखिम अधिक हो सकते हैं।
ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency)ग्रीन हाइड्रोजन के निर्माण और LOHC से हाइड्रोजन को पुनः पृथक करने (Dehydrogenation) दोनों प्रक्रियाओं में अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
बहुआयामी दृष्टिकोणभविष्य के ऊर्जा मार्गों का निर्धारण केवल वित्तीय लाभ या लागत घटाने के आधार पर नहीं, बल्कि पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

 

वैश्विक ऊर्जा भूगोल में बड़े बदलाव के संकेत

ग्रीन हाइड्रोजन और LOHC तकनीक वैश्विक ऊर्जा व्यापार के पारंपरिक मानचित्र को पूरी तरह बदल सकती है। प्रचुर मात्रा में सौर और पवन ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता के कारण अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, मध्य पूर्व और ओशिनिया के कई क्षेत्र भविष्य में हाइड्रोजन उत्पादन के वैश्विक हब बन सकते हैं। दूसरी ओर, यूरोप, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे औद्योगिक क्षेत्र ऊर्जा के प्रमुख आयातक की भूमिका में होंगे।

निष्कर्ष: न्यायसंगत और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य की आवश्यकता

विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का मानना है कि हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था का विकास केवल कार्बन उत्सर्जन और लागत को कम करने के तकनीकी लक्ष्यों तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह अत्यंत आवश्यक है कि:

उत्पादन प्रक्रियाओं की दक्षता बढ़ाई जाए: तकनीकी नवाचार के माध्यम से LOHC से हाइड्रोजन निकालने की ऊर्जा खपत को कम किया जाए।

स्थानीय समाजों का हित सुरक्षित हो: निर्यातक देशों (विशेष रूप से विकासशील देशों) के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के साथ-साथ वहाँ के स्थानीय समुदायों का सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित किया जाए।

एक सफल और सर्वसमावेशी वैश्विक हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के लिए तकनीक, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच एक सुदृढ़ संतुलन बनाना ही समय की मुख्य माँग है।


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