60 वर्षों की यात्रा, गुरु-शिष्य परंपरा और एआई युग में शिक्षकों की बदलती भूमिका

06 Oct 2026
 60 वर्षों की यात्रा, गुरु-शिष्य परंपरा और एआई युग में शिक्षकों की बदलती भूमिका

सूचना के महासागर में ज्ञान, नैतिकता और मानवीय संवेदना की राह दिखाते शिक्षक: सम्मान ही नहीं, सुरक्षा और संसाधनों की भी दरकार।

 

 

हर साल 5 अक्टूबर को दुनिया भर में विश्व शिक्षक दिवस (World Teachers' Day) मनाया जाता है। वर्ष 2026 का यह अवसर ऐतिहासिक है, क्योंकि यह वर्ष 1966 की ऐतिहासिक आईएलओ-यूनेस्को (ILO-UNESCO) सिफारिश के 60 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। इस अंतरराष्ट्रीय ढाँचे ने पहली बार यह स्वीकार किया था कि शिक्षा की गुणवत्ता सीधे तौर पर शिक्षकों की योग्यता, कामकाजी परिस्थितियों और सामाजिक सम्मान पर निर्भर करती है। (वर्ष 1997 में उच्च शिक्षा के शिक्षण कर्मियों को शामिल कर इसे और व्यापक बनाया गया था)।

भारतीय सभ्यता में 'गुरु' का स्थान और एनसीएफ-2023

भारत में शिक्षक का स्थान आधुनिक स्कूली ढाँचे से कहीं अधिक गहरा और प्राचीन है:

समग्र विकास का आधार: भारतीय परंपरा में गुरु केवल जानकारी देने वाला माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, नैतिकता और जीवन-दृष्टि का मार्गदर्शक रहा है।

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) 2023: नई राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा में गुरु-शिष्य परंपरा को प्रभावी सीखने की आधारभूत अवधारणा के रूप में शामिल किया गया है। इसमें ज्ञान की प्राप्ति के लिए शिक्षक और विद्यार्थी के बीच संवाद, चर्चा और विवेकपूर्ण विचार-विमर्श को विशेष महत्व दिया गया है।

तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में शिक्षक

डिजिटल क्रांति और एआई के आगमन ने शिक्षक की भूमिका को समाप्त करने के बजाय और अधिक महत्वपूर्ण तथा चुनौतीपूर्ण बना दिया है:

पहलूतकनीक / एआईशिक्षक की भूमिका
सूचना की उपलब्धताविशाल डेटा और त्वरित उत्तर उपलब्ध कराना।सही और गलत सूचना में अंतर समझाना तथा विश्वसनीयता की परख सिखाना।
सीखने की प्रक्रियास्वचालित कार्य और कंटेंट डिलीवरी।संदर्भ प्रदान करना, नैतिकता, आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) और मानवीय संवेदना से जोड़ना।
भविष्य की राहअध्ययन का एक साधन।तकनीक के जिम्मेदार और प्रभावी इस्तेमाल का मार्गदर्शक बनना।

वैश्विक चुनौतियाँ: केवल सम्मान नहीं, संसाधनों की भी आवश्यकता

विश्व शिक्षक दिवस केवल औपचारिकता या सम्मान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि शिक्षकों के सामने मौजूद जमीनी चुनौतियों का समाधान भी जरूरी है:

शिक्षकों की भारी कमी: यूनेस्को (UNESCO) और इंटरनेशनल टास्क फोर्स ऑन टीचर्स फॉर एजुकेशन 2030 के अनुसार, वर्ष 2030 तक प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के वैश्विक लक्ष्य को हासिल करने के लिए दुनिया भर में 4.4 करोड़ अतिरिक्त शिक्षकों की आवश्यकता होगी।

कार्यभार और संसाधन: लगातार बढ़ता प्रशासनिक कार्यभार, बुनियादी संसाधनों की कमी और लगातार बदलते पाठ्यक्रम के अनुरूप निरंतर प्रशिक्षण (Training) न मिल पाना बड़ी बाधाएँ हैं।

कार्य परिस्थितियों में सुधार: शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा, उचित वेतन और सम्मानजनक कामकाजी माहौल प्रदान करना वर्तमान समय की सबसे बड़ी मांग है।

 

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