डिजिटल ब्लैकबोर्ड से एआई तक: पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में स्कूली शिक्षा की नई भोर

07 Sep 2026
डिजिटल ब्लैकबोर्ड से एआई तक: पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में स्कूली शिक्षा की नई भोर

किताबों के पन्नों से निकलकर अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संग गढ़ेगा भविष्य; असम, बिहार और झारखंड में शिक्षकों के प्रशिक्षण से लेकर व्यक्तिगत शिक्षण तक एआई की ऐतिहासिक दस्तक।

 

 

पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के राज्यों में स्कूली शिक्षा का पारंपरिक ढांचा अब एक बड़े और क्रांतिकारी बदलाव के मुहाने पर खड़ा है। कक्षा और किताबों तक सीमित रहने वाली पारंपरिक पढ़ाई में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का समावेश एक नए युग की शुरुआत का संकेत दे रहा है। शिक्षक दिवस के अवसर पर असम, बिहार और झारखंड से सामने आई नीतियां और राज्य सरकारों के कदम यह स्पष्ट करते हैं कि आने वाले समय में शिक्षण पद्धतियों को अधिक समावेशी, व्यक्तिगत और प्रभावी बनाने के लिए एआई को मुख्य धारा से जोड़ा जा रहा है।

असम: एक लाख शिक्षकों का सशक्तिकरण और तकनीक का समावेश

शिक्षा के क्षेत्र में एआई के व्यापक इस्तेमाल को लेकर असम ने सबसे ठोस और दूरगामी पहल की है। असम सरकार ने अपनी स्कूल शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से छह प्रमुख वैश्विक व राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

व्यापक शिक्षक प्रशिक्षण: राज्य के शिक्षा मंत्री रानोज पेगू के अनुसार, मई 2027 तक कक्षा 6 से 12 तक के लगभग एक लाख शिक्षकों को एआई दक्षता में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए आईआईटी मद्रास, बोधन एआई और गूगल जैसी दिग्गज संस्थाओं के साथ साझेदारी की गई है।

व्यक्तिगत और एआई-सहायित शिक्षण: यह पहल केवल शिक्षकों तक सीमित न रहकर सीधे विद्यार्थियों के अनुभव को बेहतर बनाएगी। एआई आधारित उपकरणों की मदद से विद्यार्थियों की पढ़ने की क्षमता और मूलभूत साक्षरता का सटीक मूल्यांकन किया जाएगा।

नवाचार और सामाजिक सुधार: तकनीक का प्रयोग डिजिटल साक्षरता, डिजाइन सोच और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्कूल से बाहर छूटे किशोरों—विशेषकर लड़कियों—की पहचान और उनके पुनर्नियोजन में भी किया जाएगा।

बिहार: गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और 'बिहार विद्या साथी' की पहल

बिहार में भी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा को आधुनिक तकनीक से लैस करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एआई-आधारित शिक्षण तंत्र को विकसित करने की रूपरेखा साझा की।

वैश्विक दिग्गज संस्थाओं का साथ: राज्य सरकार शिक्षकों को आधुनिक एआई टूल्स में दक्ष बनाने के लिए गूगल के साथ करार कर रही है। इसके साथ ही माइक्रोसॉफ्ट और 'सर्वम एआई' के सहयोग से एक आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता पारिस्थितिकी तंत्र (AI Ecosystem) तैयार किया जा रहा है।

24/7 डिजिटल समाधान: राज्य में संचालित 'बिहार विद्या साथी' पहल के जरिए संवाद-आधारित डिजिटल शिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रणाली विद्यार्थियों को 24 घंटे एआई की मदद से अपनी शंकाओं का समाधान पाने और पढ़ाई से जुड़े प्रश्नों के त्वरित उत्तर प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करती है।

झारखंड: सहज, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर

झारखंड में भी बदलती तकनीक के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को ढालने की प्रतिबद्धता दिखाई गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि समय की मांग के अनुसार शिक्षा में एआई और आधुनिक तकनीकों का जुड़ाव अत्यंत आवश्यक है।

आवश्यकता-आधारित शिक्षण: राज्य सरकार का मुख्य ध्यान एआई के माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को अधिक सहज और प्रत्येक विद्यार्थी की व्यक्तिगत क्षमता के अनुरूप बनाने पर है।

बुनियादी सुधार: नई तकनीक को अपनाने के साथ-साथ राज्य सरकार का जोर शिक्षा प्रणाली की मौजूदा कमियों को दूर करने और दूरदराज के क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने पर केंद्रित है।

शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का यह समावेश केवल तकनीकों का प्रयोग नहीं, बल्कि भारत के शैक्षणिक परिदृश्य को बदलने की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है। जहां एक ओर शिक्षक अब नए जमाने के डिजिटल उपकरणों से लैस होकर अधिक प्रभावी ढंग से पढ़ा सकेंगे, वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों को उनकी अपनी गति और आवश्यकता के अनुसार सीखने का अवसर मिलेगा। पूर्वी भारत के राज्यों की यह सामूहिक पहल आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरक मॉडल साबित होगी।


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