मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य का नया प्रभात: 'सुमन रोडमैप 2030' से रोकी जाएगी हर अकाल मृत्यु

12 Sep 2026
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य का नया प्रभात: 'सुमन रोडमैप 2030' से रोकी जाएगी हर अकाल मृत्यु

लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में देश भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं ने तय की 2030 तक शून्य रोकी जा सकने वाली मौतों की ठोस रणनीति।

 

 

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) द्वारा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 2-3 सितंबर, 2026 को “सुमन रोडमैप 2030 – देखभाल की निरंतरता में तेजी” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य देश में माताओं और नवजात शिशुओं की रोकी जा सकने वाली मौतों को वर्ष 2030 तक शून्य के स्तर पर लाना है।

नीतिगत प्रतिबद्धता और भव्य उद्घाटन

कार्यशाला की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक श्रीमती आराधना पटनायक ने की। उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री तथा चिकित्सा शिक्षा व स्वास्थ्य मंत्री श्री ब्रजेश पाठक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

संस्थागत पंजीकरण और तैयारी: श्री ब्रजेश पाठक ने अनचाहे गर्भ को रोकने और नियोजित गर्भावस्था सुनिश्चित करने के लिए नवविवाहित जोड़ों के समय पर पंजीकरण को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में हर महिला को सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा देने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

मातृ स्वास्थ्य का जीवन-चक्र दृष्टिकोण: श्रीमती आराधना पटनायक ने मुख्य भाषण में स्पष्ट किया कि गर्भावस्था एक प्राकृतिक और खुशी भरा अनुभव है, जिसकी सुरक्षा और गरिमा सर्वोपरि है। भारत ने एमएमआर (मातृ मृत्यु दर) घटाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन संवेदनशील तथा दूरदराज के क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

सुमन रोडमैप 2030: दो-तरफा और केंद्रित ढांचा

यह रोडमैप पूरी मातृ स्वास्थ्य यात्रा—गर्भावस्था से पूर्व, प्रसवपूर्व, प्रसव के समय और प्रसवोत्तर देखभाल—को एकीकृत करता है।

खंडलक्ष्य और दायराप्रमुख रणनीतियाँ
सेक्शन A13 'हाई-फोकस' राज्य और 130 उच्च जोखिम वाले जिलेजहां मातृ-शिशु मृत्यु दर अधिक है, वहां केंद्रित व त्वरित बुनियादी ढांचा तैयार करना।
सेक्शन Bदेश के सभी राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशसतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करना और हासिल की गई प्रगति को निरंतर बनाए रखना।

कार्यशाला में जन्म प्रतीक्षा गृह (BWH) IEC सामग्री के दिशा-निर्देश और सुमन रोडमैप 2030 पर एक विशेष वीडियो भी जारी किया गया।

राज्यों की अभिनव पहल और तकनीकी सत्र

देश भर से आए 200 से अधिक प्रतिनिधियों, तकनीकी विशेषज्ञों और विकास साझेदारों (जैसे WHO, UNICEF, UNFPA, Gates Foundation, FOGSI) की उपस्थिति में विभिन्न राज्यों के श्रेष्ठ अभ्यासों को साझा किया गया:

ओडिशा: Non-pneumatic Anti-Shock Garment (NASG) और Uterine Balloon Tamponade (UBT) द्वारा प्रसवोत्तर रक्तस्राव (PPH) का प्रबंधन।

मध्य प्रदेश: 'सुमन पंचायत' और 'सुमन सखी चैटबॉट' का संचालन।

छत्तीसगढ़: 'मदर्स पिकनिक' और 'गोसाईया सम्मेलन' जैसी सामाजिक जागरूकता पहल।

उत्तराखंड एवं महाराष्ट्र: स्टेट मैटरनल हेल्थ वॉर रूम और वात्सल्य पहल।

उत्तर प्रदेश: मातृ एवं नवजात देखभाल में व्यापक डिजिटल नवाचार।

समाधान-उन्मुख दृष्टिकोण और साझा संकल्प

समूह अभ्यासों के दौरान चार प्रमुख विषयों—उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था का प्रबंधन, प्रसव-पूर्व देखभाल, PPH नियंत्रण व त्वरित रेफरल परिवहन, और सिजेरियन सेक्शन सेवाओं के मानकीकरण—पर व्यावहारिक समाधान विकसित किए गए।

यह राष्ट्रीय कार्यशाला इस साझा संकल्प की पुष्टि के साथ संपन्न हुई कि देश के किसी भी हिस्से में किसी भी मां या नवजात शिशु की जान ऐसे कारणों से नहीं जानी चाहिए जिन्हें रोका जा सकता था। 'सुमन रोडमैप 2030' भारत के स्वास्थ्य तंत्र में एक ऐतिहासिक और टिकाऊ सुधार की नींव रख चुका है।


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