भारत का जनसांख्यिकी लाभांश: अवसर, चुनौतियाँ और कौशल विकास की अनिवार्यता
अगले दशक तक भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी कार्यशील आबादी होगी, लेकिन शिक्षा-रोजगार के असंतुलन को दूर किए बिना इस अवसर को भुनाना नामुमकिन है।
जब किसी देश में कार्यशील आबादी (15-59 वर्ष) का अनुपात बच्चों और बुजुर्गों की आश्रित आबादी से अधिक हो जाता है, तो उसे जनसांख्यिकी लाभांश (Demographic Dividend) कहा जाता है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत वर्तमान में इस स्वर्णिम दौर से गुजर रहा है, जो वर्ष 2041 के आसपास अपने चरम (59% कार्यशील आबादी) पर होगा।
यह स्थिति देश के लिए एक दोहरा अवसर और चुनौती प्रस्तुत करती है।
1. आँकड़ों के आइने में भारत का युवा परिदृश्य
| सूचक / मानक | वर्तमान स्थिति / आँकड़े | निहितार्थ |
|---|---|---|
| वार्षिक श्रम बल आगमन | 70 से 80 लाख युवा हर साल | अर्थव्यवस्था को हर साल इतनी ही संख्या में गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजित करने होंगे। |
| कुल बेरोजगारी में युवाओं का हिस्सा | लगभग 83% | देश की बेरोजगारी की समस्या मुख्य रूप से युवा केंद्रित है। |
| व्यावसायिक प्रशिक्षण की पहुँच | केवल 4% युवा | 96% युवाओं के पास बाजार की माँग के अनुसार औपचारिक कौशल प्रशिक्षण का अभाव है। |
| NEET दर (शिक्षा/रोजगार/प्रशिक्षण से बाहर) | हर तीसरा युवा | युवाओं की बड़ी संख्या न तो पढ़ रही है, न काम कर रही है और न ही कौशल सीख रही है। |
2. शिक्षित बेरोजगारी: एक विरोधाभासी संकट
भारत में पारंपरिक धारणा के विपरीत, शिक्षा का स्तर जितना अधिक है, बेरोजगारी की दर उतनी ही चिंताजनक पाई गई है।
स्नातक (Graduates): 2022 में स्नातकों के बीच बेरोजगारी दर 29% तक दर्ज की गई।
निरक्षर / अनपढ़ आबादी: निरक्षर वर्ग के लिए यह दर महज 3.4% रही, क्योंकि वे अनौपचारिक या कम वेतन वाले शारीरिक श्रम में आसानी से लग जाते हैं।
कुल शिक्षित बेरोजगार: देश के कुल बेरोजगारों में 66% हिस्सा शिक्षित युवाओं का है।
कारण: शैक्षणिक संस्थानों के पाठ्यक्रम और उद्योग जगत (Industry Standards) की व्यावहारिक आवश्यकताओं के बीच गहरा अंतर (Skill Mismatch)।
3. वैश्विक परिदृश्य और ब्रेन ड्रेन (Brain Drain)
विश्व बैंक की "जॉब्स फॉर रेजिलिएंस" रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशियाई क्षेत्र (विशेषकर भारत) में पर्याप्त अवसरों के अभाव के कारण प्रतिभा का बाहर पलायन हो रहा है।
विकसित बनाम विकासशील देश: विकसित देश अपनी युवा आबादी के दौर को पार कर चुके हैं और अब बुजुर्ग होती आबादी व श्रम संकट का सामना कर रहे हैं। इसके विपरीत, दुनिया की 90% से अधिक युवा आबादी भारत जैसे विकासशील देशों में है।
पलायन (Migration): 2010 से 2023 के बीच इस क्षेत्र से कार्यशील आबादी का 2% हिस्सा बेहतर अवसरों की तलाश में विदेशों की ओर पलायन कर गया।
4. आगे की राह: क्या करने की आवश्यकता है?
यदि भारत समय रहते अपनी बढ़ती कार्यशील आबादी के लिए उपयुक्त अवसर नहीं पैदा करता, तो यह 'जनसांख्यिकी लाभांश' (Demographic Dividend) बदलकर 'जनसांख्यिकी आपदा' (Demographic Disaster) में रूपांतरित हो सकता है, जिससे सामाजिक अशांति और आर्थिक अस्थिरता पैदा होगी।
व्यापक कौशल विकास (Scale-up Skilling): केवल 4% व्यावसायिक प्रशिक्षण दर को बढ़ाकर 50% से अधिक करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर उद्योगों के साथ मिलकर री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग कार्यक्रम चलाने होंगे।
शिक्षा सुधार: उच्च शिक्षा को केवल डिग्री देने तक सीमित न रखकर प्रयोगात्मक और तकनीकी ज्ञान से जोड़ना।
मैन्युफैक्चरिंग व सर्विस सेक्टर का विस्तार: श्रम-गहन (Labour-intensive) उद्योगों को बढ़ावा देना ताकि हर साल श्रम बल में शामिल होने वाले 70-80 लाख युवाओं को समाहित किया जा सके।
उद्यमिता को प्रोत्साहन: युवाओं को केवल 'नौकरी पाने वाला' बनाने के बजाय 'नौकरी देने वाला' (Job Creator) बनाने हेतु एमएसएमई (MSME) और स्टार्टअप्स को वित्तीय व नीतिगत सहायता देना।