रेबीज-मुक्त समाज की ओर: 'स्ट्रॉन्गर टुगेदर' संकल्प और 2030 का लक्ष्य

28 Sep 2026
रेबीज-मुक्त समाज की ओर: 'स्ट्रॉन्गर टुगेदर' संकल्प और 2030 का लक्ष्य

"समय पर सतर्कता, कुत्तों का टीकाकरण और त्वरित इलाज: रेबीज को हराने की अचूक त्रिवेणी"

 

 

रेबीज एक अत्यंत गंभीर और घातक संक्रामक बीमारी है, लेकिन राहत की बात यह है कि सही जानकारी और समय पर उठाए गए कदमों से इसे 100% रोका जा सकता है। हर साल 28 सितंबर को 'विश्व रेबीज दिवस' मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में लोगों को रेबीज के खतरे, इसके प्रसार और बचाव के वैज्ञानिक तरीकों के प्रति जागरूक करना है। यदि रेबीज का संक्रमण शरीर में फैल जाए और लक्षण दिखाई देने लगें, तो यह बीमारी लगभग शत-प्रतिशत जानलेवा साबित होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में रेबीज से होने वाली मौतों में से लगभग 99 प्रतिशत मामले संक्रमित कुत्तों के काटने से जुड़े होते हैं।

1. विश्व रेबीज दिवस 2026 की थीम: ‘स्ट्रॉन्गर टुगेदर’

वर्ष 2026 के लिए विश्व रेबीज दिवस का आधिकारिक संदेश ‘स्ट्रॉन्गर टुगेदर’ (साथ मिलकर अधिक मजबूत) रखा गया है। यह थीम इस बात पर जोर देती है कि रेबीज उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग या चिकित्सकों की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए:

आम नागरिकों और स्थानीय समुदायों की सहभागिता,

पशु चिकित्सकों (Veterinarians) का सक्रिय योगदान,

सरकारी नीतियों और स्वास्थ्यकर्मियों का समर्पण आवश्यक है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, कुत्तों का व्यापक स्तर पर टीकाकरण, बेहतर सर्विलांस (निगरानी) और जन-जागरूकता ही इस वैश्विक खतरे को समाप्त करने के मुख्य स्तंभ हैं।

2. भारत में रेबीज की स्थिति और ‘जीरो बाय 30’ लक्ष्य

भारत में रेबीज लंबे समय से एक बड़ी जनस्वास्थ्य चुनौती रहा है। पूर्व में डब्ल्यूएचओ द्वारा भारत में प्रतिवर्ष 18,000 से 20,000 मौतों का अनुमान व्यक्त किया जाता था। हालांकि, ICMR के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (NIE) द्वारा 2022-23 में किए गए गहन अध्ययन के अनुसार:

भारत में प्रतिवर्ष लगभग 5,726 मानव रेबीज मौतों का अनुमान है।

देश में हर साल करीब 91 लाख पशु-काटने (Animal Bites) की घटनाएं दर्ज होती हैं।

विश्व स्तर पर कुत्तों के माध्यम से फैलने वाले रेबीज से होने वाली मौतों को समाप्त करने के लिए ‘जीरो बाय 30’ (Zero by 30) का संकल्प लिया गया है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक इस बीमारी से मानव मृत्यु दर को शून्य पर लाना है।

3. क्या है रेबीज और इसके प्रमुख लक्षण?

रेबीज एक न्यूरोट्रोपिक वायरल बीमारी है जो सीधे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी) पर हमला करती है। यह संक्रमित जानवर की लार के जरिए फैलती है।

संक्रमण के तरीके:

संक्रमित कुत्ते या जानवर के काटने या खरोंचने से।

किसी खुले घाव, आंख, नाक या मुंह पर संक्रमित जानवर की लार लगने से।

प्रमुख लक्षण: रेबीज के लक्षण संपर्क में आने के कई हफ्तों या महीनों बाद प्रकट हो सकते हैं।

शुरुआती लक्षण: हल्का बुखार, सिरदर्द, शारीरिक कमजोरी और काटे गए स्थान पर जलन, दर्द या झनझनाहट।

गंभीर लक्षण: अत्यधिक बेचैनी, मानसिक भ्रम (Confusion), निगलने में कठिनाई, पानी से अत्यधिक डर (Hydrophobia), मुंह से अत्यधिक लार बहना, लकवा (Paralysis) और अंततः बेहोशी।

4. कुत्ते के काटने पर तत्काल क्या करें? (प्रारंभिक चिकित्सा)

किसी भी संदिग्ध जानवर के काटने या खरोंचने पर समय गँवाए बिना तुरंत निम्नलिखित कदम उठाएं:

घाव की सफाई: घाव को तुरंत बहते पानी और साबुन से कम से कम 15 मिनट तक लगातार धोएं। यह प्रक्रिया घाव में मौजूद वायरस की मात्रा को काफी हद तक कम कर देती है।

चिकित्सकीय परामर्श: प्राथमिक सफाई के तुरंत बाद नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर के पास जाएं।

पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP): डॉक्टर की सलाह पर समय पर रेबीज का टीका (Anti-Rabies Vaccine) लगवाएं। घाव की गंभीरता (Category III) के आधार पर डॉक्टर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) की खुराक भी दे सकते हैं।

5. रोकथाम ही सर्वोत्तम सुरक्षा: टीकाकरण की भूमिका

रेबीज की श्रृंखला को तोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर रोकथाम बेहद जरूरी है:

पालतू एवं आवारा कुत्तों का टीकाकरण: अपने पालतू कुत्तों को पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार समय पर रेबीज रोधी टीका लगवाएं। साथ ही, सामुदायिक स्तर पर आवारा कुत्तों के सामूहिक टीकाकरण अभियानों में सहयोग दें।

प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PrEP): उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों (जैसे पशु चिकित्सक, पशुपालक, चिड़ियाघर के कर्मचारी और प्रयोगशाला तकनीशियन) को पहले ही बचाव टीका लगवा लेना चाहिए।

विश्व रेबीज दिवस हमें याद दिलाता है कि थोड़ी सी सतर्कता, सही जानकारी और समय पर लिया गया फैसला किसी की जिंदगी बचा सकता है। आइए, मिलकर संकल्प लें और 'जीरो बाय 30' के सपने को साकार बनाएं।

 

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