शिक्षा में गुणवत्ता और आनंद का संगम: नूंह जिले में एफएलएन, पुस्तक पठन और जॉयफुल सैटरडे पर विशेष जोर
हर बच्चा सीखे, हर दिन आगे बढ़े—नियमित मॉनिटरिंग और अनुभवात्मक गतिविधियों से बदलेगी विद्यालयों की तस्वीर।
विद्यालयों में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति के साथ-साथ उनके वास्तविक सीखने के स्तर (Learning Outcomes) में निरंतर सुधार लाने के उद्देश्य से जिला स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी मामराज रावत ने स्पष्ट किया कि विद्यालय स्तर पर संचालित प्रत्येक गतिविधि का मुख्य लक्ष्य बच्चों के सीखने के स्तर, उनके सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास तथा विद्यालय के समग्र परिवेश में सकारात्मक एवं स्थायी बदलाव लाना होना चाहिए।
नियमित मॉनिटरिंग और समयबद्ध समाधान पर बल
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (BEOs) एवं क्लस्टर रिसोर्स सेंटर (CRC) हेड को निर्देश दिए कि वे विद्यालयों की नियमित एवं प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली शैक्षणिक व प्रशासनिक समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाए।
बैठक के दौरान निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं की गहन समीक्षा की गई:
उपस्थिति एवं बुनियादी साक्षरता: विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, एफएलएन (Foundational Literacy and Numeracy) तथा विद्यार्थियों के सीखने का स्तर।
आधारभूत सुविधाएं: विद्यालय सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं तथा बाल संरक्षण।
डिजिटल एवं वित्तीय प्रबंधन: डिजिटल संसाधनों का उपयोग व रखरखाव, प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक (PGI) तथा अनुदान (Grants) का समुचित उपयोग।
त्वरित कार्रवाई: जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विद्यालय स्तर की समस्याओं को तथ्यों एवं की गई कार्रवाई सहित जिला स्तर पर प्रस्तुत किया जाए ताकि आवश्यक निर्णय शीघ्र लिए जा सकें।
अनुभवात्मक एवं आनंदमयी शिक्षा की पहल
बैठक में जिला एफएलएन कोऑर्डिनेटर नूंह, डॉ. कुसुम मलिक ने जिले में विद्यार्थियों के अधिगम को आनंदमय और अनुभवात्मक बनाने हेतु चलाए जा रहे विशेष अभियानों की विस्तृत जानकारी साझा की:
'एक माह–एक पुस्तक' अभियान:
प्रत्येक विद्यार्थी को प्रतिमाह कम से कम एक पुस्तक पढ़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। डॉ. कुसुम मलिक ने बताया कि नियमित पुस्तक पठन से बच्चों में भाषा कौशल, समझ और कल्पनाशक्ति का तीव्र विकास होता है।
जॉयफुल सैटरडे एवं फिल्म प्रदर्शन:
शनिवार को आनंदमयी गतिविधियों के तहत विद्यालयों में ज्ञानवर्धक व प्रेरणादायक फिल्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है, जिससे मनोरंजन के साथ-साथ बच्चों को सामाजिक, नैतिक एवं जीवनोपयोगी संदेश मिलते हैं।
एक्सपोजर विजिट (शैक्षणिक भ्रमण):
विद्यार्थियों को शैक्षणिक भ्रमण पर ले जाया जा रहा है, जिससे उन्हें कक्षा-कक्ष के किताबी ज्ञान को वास्तविक जीवन के व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ने का अवसर प्राप्त होता है।
समग्र विकास हेतु आपसी समन्वय का आह्वान
बैठक के समापन पर सभी खंड शिक्षा अधिकारियों एवं सीआरसी हेड को सख्त निर्देश दिए गए कि जिला स्तर पर निर्धारित सभी शैक्षणिक कार्यक्रमों की प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि इन योजनाओं का सीधा लाभ प्रत्येक विद्यालय और अंतिम विद्यार्थी तक पहुंचे। अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत रहने का संकल्प दिलाया गया।
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