उम्र लंबी, सेहत छोटी: क्या हम वाकई लंबा और स्वस्थ जीवन जी रहे हैं?

04 Oct 2026
उम्र लंबी, सेहत छोटी: क्या हम वाकई लंबा और स्वस्थ जीवन जी रहे हैं?

"केवल जीवन में वर्ष जोड़ना ही काफी नहीं, वर्षों में स्वस्थ जीवन जोड़ना ही असली उपलब्धि है।"

कोरोना महामारी के अप्रत्याशित संकट ने वैश्विक स्वास्थ्य ढांचे को हिलाकर रख दिया था। कई देशों में लोगों की औसत उम्र में गिरावट आई और स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं। अब जब दुनिया इस महामारी के झटके से उबर रही है, तब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नए वैश्विक स्वास्थ्य अनुमान एक नई और गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में वैश्विक औसत जीवन प्रत्याशा 73.3 वर्ष दर्ज की गई, जो 2019 के 73.4 वर्ष के लगभग बराबर है।

हालांकि, राहत की इस खबर के पीछे एक चिंताजनक पहलू छुपा है। इंसानों की उम्र तो बढ़ी है, लेकिन स्वस्थ जीवन के वर्ष (Healthy Life Expectancy) उतनी तेजी से वापस नहीं लौटे हैं। 2023 में स्वस्थ जीवन प्रत्याशा 62.8 वर्ष रही, जो 2019 की तुलना में 0.4 वर्ष कम है। इसका सीधा अर्थ है कि हम जिंदगी में साल तो जोड़ रहे हैं, लेकिन उन सालों में 'सेहत' जोड़ने में पीछे छूट रहे हैं।

बीमारियों का बदलता स्वरूप: संक्रामक से गैर-संचारी का खतरा

विश्व भर में बीमारियों का ढांचा तेजी से बदला है। एक दौर था जब टीबी, हैजा या मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियां मौतों की मुख्य वजह होती थीं। आज गैर-संचारी रोग (NCDs) जैसे हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, डिमेंशिया और मानसिक तनाव सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं।

74% मौतें गैर-संचारी रोगों से: डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, 2023 में दुनिया में हुई कुल मौतों में से 74 प्रतिशत की वजह गैर-संचारी बीमारियां थीं। वर्ष 2000 में यह आंकड़ा 58 प्रतिशत था।

वैश्विक बदलाव: दुनिया में मौत के 10 मुख्य कारणों में से अब 8 गैर-संचारी रोग हैं।

कम आय वाले देशों में असर: यह संकट सिर्फ अमीर या विकसित देशों तक सीमित नहीं है। 2023 में पहली बार कम आय वाले देशों में भी संक्रामक बीमारियों से होने वाली मौतों का अनुपात कुल मौतों के आधे से कम हो गया।

स्वास्थ्य के चार बड़े दुश्मन: दिल का दौरा, मधुमेह, डिमेंशिया और मानसिक तनाव

1. दिल की बीमारियां: अब भी सबसे बड़ा खतरा

हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियां (विशेष रूप से 'इस्केमिक हार्ट डिजीज') दुनिया में मौतों का सबसे प्रमुख कारण बनी हुई हैं।

वर्ष 2023 में इस बीमारी से करीब 95 लाख लोगों की जान गई।

इसके कारण वैश्विक स्तर पर लगभग 21 करोड़ स्वस्थ जीवन वर्ष (DALYs) प्रभावित हुए।

2. मधुमेह (Diabetes) का बढ़ता प्रकोप

वर्ष 2000 के बाद से मधुमेह के कारण होने वाली मौतों के जोखिम में भारी वृद्धि हुई है। विशेषकर दक्षिण-पूर्व एशिया में असंतुलित खानपान और गतिहीन जीवनशैली के कारण मधुमेह की समस्या विकराल रूप ले रही है।

3. डिमेंशिया: याददाश्त पर संकट

भूलने और सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित करने वाली बीमारी 'डिमेंशिया' के मामलों में हैरान करने वाला उछाल आया है:

वर्ष 2000 में डिमेंशिया मौत का 19वां सबसे बड़ा कारण था, जो 2023 में छलांग लगाकर 5वें स्थान पर पहुंच गया।

इस दौरान डिमेंशिया से होने वाली मौतों की संख्या तीन गुना हो गई है।

4. मानसिक स्वास्थ्य का मूक संकट

2019 से 2023 के बीच वैश्विक स्तर पर मानसिक समस्याओं में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई:

अवसाद (Depression): स्वस्थ जीवन के नुकसान की दर में 20% की बढ़ोतरी हुई।

चिंता (Anxiety): चिंता संबंधी विकारों के कारण होने वाले नुकसान में 45% का उछाल दर्ज किया गया।

वर्ष 2023 में केवल अवसाद और चिंता के कारण 11 करोड़ स्वस्थ जीवन वर्ष प्रभावित हुए।

अब सिर्फ लंबी उम्र नहीं, 'गुणवत्तापूर्ण जीवन' है जरूरी

डब्ल्यूएचओ के आंकड़े स्पष्ट संदेश देते हैं कि विज्ञान और चिकित्सा ने हमें लंबी उम्र का वरदान तो दिया है, लेकिन जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) बनाए रखना हमारी सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

बढ़ती उम्र और बदलती जीवनशैली के इस दौर में वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों को बुनियादी बदलाव करने होंगे:

प्राथमिक देखभाल पर जोर: बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाना (Early Diagnosis)।

जीवनशैली में सुधार: स्वस्थ आहार, शारीरिक सक्रियता और तनाव प्रबंधन को बढ़ावा देना।

मजबूत स्वास्थ्य डेटा: नीति-निर्माण के लिए सटीक और वास्तविक आंकड़ों का उपयोग।

दुनिया कोरोना संकट से तो बाहर निकल आई है, लेकिन गैर-संचारी बीमारियों का यह धीमा संकट मानव सभ्यता के सामने खड़ा है। आने वाले समय में हमारी सफलता का पैमाना यह नहीं होगा कि हम कितने साल जीते हैं, बल्कि यह होगा कि हम उन वर्षों को कितना स्वस्थ, खुशहाल और जीवंत बना पाते हैं।

 

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