किताबों में व्यापार की बातें: NCERT ने कक्षा 9वीं के पाठ्यक्रम में शामिल कीं 'स्टार्टअप' और 'बिजनेस' की प्रेरणादायक कहानियाँ
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत 'विकसित भारत 2047' और 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को मजबूती देने के लिए स्कूली स्तर पर शुरू हुई उद्यमिता और व्यावहारिक शिक्षा की नई पहल।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत स्कूली पाठ्यक्रम में ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। कक्षा 9वीं की सोशल साइंस की नई किताब में अब छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर व्यावहारिक और आधुनिक आर्थिक संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इसके तहत पाठ्यक्रम में 'स्टार्टअप' और 'बिजनेस' से जुड़े नए अध्याय शामिल किए गए हैं।
'विकसित भारत 2047' और आधुनिक अर्थशास्त्र की समझ
सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक में 'Understanding Society: India and Beyond' शीर्षक के अंतर्गत एक विशेष अध्याय जोड़ा गया है। इस अध्याय में भारत के उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम, आधुनिक अर्थशास्त्र, कराधान (Taxation) और उद्यम (Enterprise) जैसे विषयों को गहराई से समझाया गया है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को 'विकसित भारत 2047' और 'आत्मनिर्भर भारत' की सोच से जोड़ना है, ताकि युवा शुरुआती दिनों से ही सिर्फ नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार का सृजन करने वाले उद्यमी बनने के लिए प्रेरित हो सकें।
छोटे विचार से बने बड़े ब्रांड: दो मुख्य प्रेरणादायक कहानियाँ
किताब में भारत के दो प्रमुख और सफल ब्रांड्स की वास्तविक एवं प्रेरणादायक कहानियों के जरिए यह समझाया गया है कि सही योजना, गुणवत्ता और निरंतर मेहनत से कैसे एक साधारण विचार बड़े उद्योग का रूप ले लेता है।
| ब्रांड / उद्योग | शुरुआती स्थिति | सफलता का सफर और सीख |
|---|---|---|
| ओबेरॉय होटल चेन | 1898 में पंजाब में जन्मे मोहन सिंह ओबेरॉय ने मात्र ₹50 की सैलरी से अपने करियर की शुरुआत की थी। | लगन, कड़ी मेहनत और सही प्लानिंग के दम पर हॉस्पिटैलिटी (होटल) क्षेत्र में विश्वस्तरीय पहचान बनाई। |
| लिज्जत पापड़ | 1959 में मुंबई की एक चाल में रहने वाली 7 महिलाओं ने मात्र ₹80 उधार लेकर काम शुरू किया। | बिना किसी बड़ी फैक्ट्री के, घर से शुरू किया गया यह काम आज महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा वैश्विक ब्रांड बन चुका है। |
व्यावहारिक अनुभव और जीवन कौशल पर जोर
NCERT का यह कदम छात्रों को वास्तविक दुनिया की आर्थिक गतिविधियों से अवगत कराएगा। इन कहानियों और अध्यायों के माध्यम से छात्र यह सीख सकेंगे कि व्यापार में जोखिम प्रबंधन, वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) और दीर्घकालिक सोच का क्या महत्व है। औपचारिक स्कूली शिक्षा के साथ-साथ ऐसे केस स्टडीज का समावेश भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक प्रगतिशील बदलाव का प्रतीक है।