रूस में लैब दुर्घटना की आशंका: प्लेग शोधकर्ता की संदिग्ध मौत से जैव-सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

06 Oct 2026
रूस में लैब दुर्घटना की आशंका: प्लेग शोधकर्ता की संदिग्ध मौत से जैव-सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

साइबेरियाई संस्थान में 28 वर्षीय वैज्ञानिक की मौत के बाद 200 लोग निगरानी में; डब्ल्यूएचओ रख रहा स्थिति पर नजर।

 

 

रूस के साइबेरिया क्षेत्र स्थित इरकुत्स्क के 'एंटी प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ साइबेरिया एंड फार ईस्ट' में कार्यरत 28 वर्षीय महिला वैज्ञानिक दार्या शिपिलोवा की 2 अक्टूबर को गंभीर निमोनिया के कारण मौत हो गई। इस घटना के बाद प्रयोगशाला से खतरनाक रोगजनक (पैथोजन) के लीक होने या लैब दुर्घटना की आशंका गहरा गई है। हालांकि, रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों और संघीय निगरानी संस्था रोस्पोत्रेबनादजोर ने लैब में किसी दुर्घटना या किसी रोगजनक के बाहर फैलने के सबूतों से इनकार किया है और बीमारी का कारण "अज्ञात निमोनिया" बताया है।

सुरक्षा के लिहाज से मृतक के संपर्क में आए लगभग 200 लोगों को क्वारंटीन कर निगरानी में रखा गया है।

टेस्ट ट्यूब टूटने की अफवाहें और डब्ल्यूएचओ का रुख

घटना के बाद स्थानीय और स्वतंत्र साइबेरियाई मीडिया (लोग बैकल के) में यह दावा किया गया कि महिला काम के दौरान न्यूमोनिक प्लेग बैक्टीरिया वाली टेस्ट ट्यूब टूट जाने से संक्रमित हुई थीं। हालांकि, रूसी अधिकारियों ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रवक्ता क्रिश्टियन लिंडमियर के अनुसार:

उपलब्ध अनौपचारिक जानकारियों के आधार पर आम जनता के लिए स्वास्थ्य जोखिम फिलहाल कम है।

डब्ल्यूएचओ रूसी अधिकारियों से लैब परीक्षणों, संपर्कों की ट्रेसिंग और परिस्थितियों का विवरण मांग रहा है।

संगठन ने लैब-लीक की संभावना को आधिकारिक तौर पर न तो प्रमाणित किया है और न ही खारिज किया है।

प्लेग: संक्रमण के तरीके और भारत का इतिहास

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक प्लेग मुख्य रूप से तीन तरीकों से फैलता है:

बूबोनिक प्लेग: संक्रमित पिस्सू (Fleas) के काटने से।

ऊतक संपर्क: संक्रमित मृत या जीवित जानवरों के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से।

न्यूमोनिक प्लेग: संक्रमित व्यक्ति के खांसने/छींकने से निकले ड्रॉपलेट्स को सांस के जरिए अंदर लेने से।

समय/कालक्षेत्रघटना और प्रभाव
1898 – 1948संपूर्ण भारतबॉम्बे से शुरू हुई महामारी में करीब 1.26 करोड़ मौतें दर्ज की गईं।
1966मुलबागल (कर्नाटक)भारत में दर्ज आखिरी मानव प्लेग मामला।
1994सूरत (गुजरात) एवं बीड (महाराष्ट्र)28 साल बाद प्रकोप; सूरत में 876 मामले व 54 मौतें। 5 लाख लोग दहशत में शहर छोड़कर चले गए थे।

 

कोविड-19 से लेकर ऐतिहासिक आंकड़े: क्या लैब लीक संभव है?

शोध और ऐतिहासिक डेटा बताते हैं कि बायोसेफ्टी प्रोटोकॉल के बावजूद प्रयोगशालाओं से रोगजनकों का बाहर निकलना अभूतपूर्व नहीं है:

कोविड-19 संदर्भ: अमेरिकी इंटेलिजेंस (ODNI) और डब्ल्यूएचओ के वैज्ञानिक सलाहकार समूह (SAGO) के अनुसार, हालांकि प्राकृतिक संक्रमण (Zoonotic Spillover) सबसे संभावित कारण दिखता है, लेकिन लैब से जुड़ी घटना (Laboratory-associated Incident) को साक्ष्यों के अभाव में पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

द लैंसेट माइक्रोब (2023 अध्ययन): स्टुअर्ट डी. ब्लैकसेल और सहयोगियों के अध्ययन (2000-2021 के आंकड़ों पर आधारित) में पाया गया:

309 लैब-एक्वायर्ड इंफेक्शंस (LAI) के मामले दर्ज हुए, जिनमें 8 मौतें हुईं (2 मौतें यर्सिनिया पेस्टिस यानी प्लेग बैक्टीरिया से थीं)।

16 घटनाएं प्रयोगशालाओं से गलती से पैथोजन्स के बाहर निकलने की दर्ज की गईं, जिनमें एंथ्रेक्स, सार्स-कोव, पोलियो, चेचक और H5N1 बर्ड फ्लू शामिल हैं।

रूस की हालिया घटना ने एक बार फिर दुनिया भर की उच्च-सुरक्षा वाली जैव-प्रयोगशालाओं (BSL Labs) के सुरक्षा मानकों और उनकी पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है।

 

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