हाशिये से मुख्यधारा की ओर: डीएनटी, एनटी और एसएनटी समुदायों के समग्र उत्थान के लिए केंद्र सरकार की दूरदर्शी पहल
विकास एवं कल्याण बोर्ड और 'SEED' योजना के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका तथा आवास के क्षेत्र में हो रहा ऐतिहासिक बदलाव।
भारत की सामाजिक संरचना में विमुक्त (De-Notified), घुमंतू (Nomadic) और अर्ध-घुमंतू (Semi-Nomadic) समुदाय लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं और विकास की मुख्यधारा से वंचित रहे हैं। इन वर्गों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को नई गति देने के लिए केंद्र सरकार का सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय एक एकीकृत और समर्पित दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रहा है। विकास एवं कल्याण बोर्ड (DWBDNC) और 'SEED' (Scheme for Economic Empowerment of DNTs) योजना के जरिए इन समुदायों के जीवन स्तर को सुधारने की ठोस पहल की गई है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: आयोग की सिफारिशों से बोर्ड का गठन
इन समुदायों की स्थिति के विस्तृत अध्ययन और सुधार हेतु जनवरी 2015 में 'डी-नोटिफाइड, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग' का गठन किया गया था।
दिसंबर 2017: आयोग ने अपनी व्यापक रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी।
फरवरी 2019: आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए सरकार ने औपचारिक रूप से विकास एवं कल्याण बोर्ड (DWBDNC) की स्थापना की।
'SEED' योजना: सशक्तिकरण के चार मुख्य स्तंभ
DWBDNC द्वारा संचालित SEED योजना इन समुदायों की बुनियादी और सामाजिक-आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है:
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं कोचिंग: युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण कोचिंग की व्यवस्था, जिससे प्रशासनिक व अन्य सेवाओं में उनकी भागीदारी बढ़ सके।
स्वास्थ्य सुरक्षा: पात्र परिवारों को स्वास्थ्य बीमा सहायता उपलब्ध कराना, जिससे वे गंभीर बीमारियों के वित्तीय बोझ से मुक्त हो सकें।
आजीविका के अवसर: समुदाय के स्तर पर स्थायी आय उत्पन्न करने वाले साधनों और कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
आवास वित्तीय सहायता: बेघर और कच्चे मकानों में रहने वाले पात्र सदस्यों को पक्के मकानों के निर्माण के लिए सीधी वित्तीय मदद देना।
संस्थागत ढांचा और भावी दिशा
정부 (केंद्र सरकार) का मूल ध्येय संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करके कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। SEED योजना का यह बहुआयामी दृष्टिकोण न केवल इन समुदायों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बना रहा है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन देकर राष्ट्र के विकास की मुख्यधारा में मजबूती से जोड़ रहा है।