डिजिटल भारत की नई उड़ान: इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और AI से सशक्त होता देश
लोकसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार, 109 करोड़ से अधिक इंटरनेट यूजर्स, रिकॉर्ड डीबीटी ट्रांसफर और IndiaAI मिशन के साथ भारत सुरक्षित डिजिटल क्रांति की ओर अग्रसर।
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने संसद में जानकारी दी कि जुलाई 2015 में शुरू किए गए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने देश के डिजिटल परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है। इस कार्यक्रम के तीन मुख्य स्तंभ—डिजिटल अवसंरचना का निर्माण, सरकारी सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी और डिजिटल साक्षरता के माध्यम से सशक्तिकरण—अब जमीनी स्तर पर व्यापक प्रभाव दिखा रहे हैं।
डिजिटल कनेक्टिविटी और अवसंरचना में ऐतिहासिक विस्तार
पिछले एक दशक में भारत के दूरसंचार और इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर में अभूतपूर्व बदलाव दर्ज किया गया है:
| घटक / संकेतक | वर्ष 2014 की स्थिति | वर्ष 2026 की स्थिति |
|---|---|---|
| कुल टेलीफोन कनेक्शन | 93.3 करोड़ | 133 करोड़ से अधिक |
| इंटरनेट उपभोक्ता | 25.15 करोड़ | 109.27 करोड़ |
| डेटा की कीमत (प्रति GB) | ₹269 | ₹8 से ₹10 |
| भारतनेट तैयार ग्राम पंचायतें | — | 2.21 लाख |
| डिजिटल भारत मोबाइल टावर | — | 24,784 |
डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) और नागरिक सेवाएं
डिजिटल पहचान और डीबीटी: सुरक्षित बायोमेट्रिक पहचान के तहत 1.44 अरब से अधिक [Aadhaar Redacted] जारी किए जा चुके हैं। इसके माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) से 56 मंत्रालयों की 318 योजनाओं के तहत ₹52 लाख करोड़ से अधिक सीधे लाभार्थियों के खातों में स्थानांतरित किए गए हैं।
UPI का वैश्विक दबदबा: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) 55.49 करोड़ नागरिकों और 6.5 करोड़ व्यापारियों को सेवा दे रहा है। यह भारत के 85% डिजिटल भुगतान और दुनिया के लगभग 50% रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजेक्शन को संचालित करता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स: डिजिलॉकर से 71.66 करोड़ यूजर्स जुड़ चुके हैं तथा ई-संजीवनी के माध्यम से 48 करोड़ से अधिक मरीजों को टेली-कंसल्टेशन सेवा दी जा चुकी है।
साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण और एआई (AI) क्रांति
सुरक्षा और कानून: देश में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 और डेटा प्रोटेक्शन रूल्स, 2025 के तहत नागरिक-केंद्रित कानून लागू किया जा रहा है। साइबर खतरों से निपटने के लिए CERT-In, I4C (इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर) और NCCC निरंतर सक्रिय हैं।
IndiaAI मिशन (₹10,371.92 करोड़): 5 वर्षों के लिए स्वीकृत इस मिशन के 7 मुख्य स्तंभ (Compute, Foundation Models, FutureSkills, AIKosh, आदि) देश में स्वदेशी LLM, एआई प्रतिभा और जिम्मेदार एआई विकास को गति दे रहे हैं।
आईटी और स्टार्टअप्स: वित्त वर्ष 2025 में भारत के आईटी-आईटीईएस उद्योग का राजस्व 283 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में एसटीपीआई (STPI) केंद्रों और 'GENESIS' योजना के जरिए तकनीक व स्टार्टअप्स का विकेंद्रीकरण किया जा रहा है।