विश्व झील दिवस 2026: संकट में धरती का 'अमृत', 85% जलीय प्रजातियों पर विलुप्ति का साया

13 Sep 2026
विश्व झील दिवस 2026: संकट में धरती का 'अमृत', 85% जलीय प्रजातियों पर विलुप्ति का साया

27 अगस्त को मनाया जा रहा दूसरा संयुक्त राष्ट्र मान्यता प्राप्त 'विश्व झील दिवस'; जैव विविधता संरक्षण और जल संकट से निपटने के लिए वैश्विक एकजुटता की अपील।

 

 

धरती के कुल भू-भाग के महज चार प्रतिशत हिस्से पर फैली 11.7 करोड़ झीलें हमारी पारिस्थितिकी (Ecology) और आजीविका की रीढ़ हैं। जमी हुई बर्फ और भूजल के अलावा, सतह पर उपलब्ध कुल मीठे पानी का 90 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं झीलों में समाहित है। हालांकि, इंसानी दखल, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के चलते आज ये अमूल्य जलस्रोत गंभीर संकट से जूझ रहे हैं।

विश्व झील दिवस का इतिहास और महत्व

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 12 दिसंबर 2024 को सर्वसम्मति से (प्रस्ताव A/RES/79/142) हर साल 27 अगस्त को 'विश्व झील दिवस' के रूप में मनाने की घोषणा की थी।

ऐतिहासिक संदर्भ: यह तिथि 27 अगस्त 1984 को जापान के शिगा प्रांत में आयोजित प्रथम 'विश्व झील सम्मेलन' की याद में चुनी गई है। शिगा में जापान की सबसे बड़ी मीठे पानी की 'बिवा झील' स्थित है।

दूसरा संस्करण: वर्ष 2025 में पहले सफल आयोजन के बाद, 27 अगस्त 2026 (गुरुवार) को दुनिया भर में इसका दूसरा आधिकारिक संस्करण मनाया जा रहा है।

मुख्य आंकड़ेविवरण
वैश्विक संख्यादुनिया भर में लगभग 11.7 करोड़ झीलें
क्षेत्रफलपृथ्वी के कुल भू-भाग का ~4%
जल भंडारसतह पर उपलब्ध मीठे/ताजा पानी का 90%
जैव विविधता में गिरावटबीते 50 वर्षों में मीठे पानी की 85% प्रजातियों में कमी

 

झीलों पर गहराते संकट के 4 मुख्य कारण

औद्योगिक और कृषि प्रदूषण: खेतों से बहकर आने वाले उर्वरक, रसायन, प्लास्टिक और अनुपचारित सीवेज का पानी झीलों के पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर रहा है।

जलवायु परिवर्तन: वैश्विक तापमान बढ़ने से वाष्पीकरण की दर तेज हुई है। अनिश्चित मानसूनी बारिश और सूखे के कारण झीलों का जलस्तर तेजी से गिर रहा है।

अत्यधिक जल दोहन: कृषि और शहरी जरूरतों के लिए अनियंत्रित तरीके से पानी खींचने से कई ऐतिहासिक झीलें सूखने की कगार पर हैं।

मीथेन उत्सर्जन का खतरा: प्रदूषित और ठहरे हुए पानी में सड़ते जैविक कचरे के कारण ग्रीनहाउस गैसों (विशेषकर मीथेन) का उत्सर्जन बढ़ रहा है।

सामूहिक संकल्प की आवश्यकता: झीलों का संरक्षण केवल सरकारों तक सीमित नहीं रह सकता। सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध, अपशिष्ट प्रबंधन और स्थानीय निकायों द्वारा जल स्रोतों की नियमित निगरानी ही जल सुरक्षा और मानव भविष्य को सुरक्षित रख सकती है।


More Blogs