डिजिटल अर्थव्यवस्था और पर्यावरण का संकट: UNCTAD रिपोर्ट में संसाधनों की खपत पर चिंता
संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास संगठन (UNCTAD) की 'डिजिटल इकोनॉमी रिपोर्ट 2024' में बढ़ते डिजिटलीकरण, एआई और क्रिप्टोकरेंसी के कारण पर्यावरण, जल संसाधन और ऊर्जा पर पड़ रहे भारी दबाव के प्रति आगाह किया गया है।
डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्रिप्टोकरेंसी जैसी तकनीकों ने जीवन और व्यापार को आसान बना दिया है। वैश्विक स्तर पर ई-कॉमर्स का दायरा बढ़कर 27 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है और 540 करोड़ लोग इंटरनेट से जुड़ चुके हैं। हालांकि, इसके समानांतर प्राकृतिक संसाधनों, जल, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों पर अभूतपूर्व दबाव बढ़ रहा है।
1. डिजिटल उपकरणों का भारी 'रॉ मटेरियल फुटप्रिंट'
डिजिटल उपकरणों का निर्माण अत्यधिक संसाधन-गहन है। समय के साथ उपकरणों की जटिलता बढ़ने के कारण खनिजों की मांग में भारी वृद्धि हुई है:
कंप्यूटर उत्पादन: 2 किलोग्राम वजनी कंप्यूटर को तैयार करने में लगभग 800 किलोग्राम कच्चे माल की आवश्यकता होती है।
स्मार्टफोन निर्माण: 1 स्मार्टफोन के उत्पादन से लेकर उसके निपटान (Life Cycle) तक करीब 70 किलोग्राम कच्चा माल इस्तेमाल होता है। इसका 80% उत्सर्जन उत्पादन चरण में ही हो जाता है।
खनिजों की मांग में वृद्धि: स्मार्टफोन में 1960 में आवर्त सारणी (Periodic Table) के केवल 10 तत्वों का उपयोग होता था, जो 2021 में बढ़कर 63 तत्वों तक पहुंच गया। विश्व बैंक के अनुसार, डिजिटलीकरण के कारण लिथियम, कोबाल्ट और ग्रेफाइट जैसे खनिजों की मांग अगले 26 वर्षों में 500% तक बढ़ सकती है।
2. ऊर्जा और पानी का अत्यधिक दोहन
डिजिटल अवसंरचना (डेटा सेंटर, ब्लॉकचेन और नेटवर्क) दुनिया की 6% से 12% बिजली की खपत कर रही है। यह क्षेत्र वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के 3.2% हिस्से के लिए जिम्मेदार है, जो विमानन और शिपिंग उद्योग के कुल उत्सर्जन के बराबर है।
| क्षेत्र / गतिविधि | ऊर्जा / जल खपत के आंकड़े | तुलनात्मक संदर्भ |
|---|---|---|
| बिटकॉइन माइनिंग (2023) | 121 टेरावाट घंटे (TWh) बिजली | फिनलैंड या बेल्जियम जैसे देशों की वार्षिक खपत से अधिक। (2015-2020 के बीच 34 गुना वृद्धि)। |
| डेटा सेंटर्स (2022) | 460 टेरावाट घंटे (TWh) बिजली | 4.2 करोड़ अमेरिकी घरों की वार्षिक बिजली खपत के बराबर (2026 तक दोगुना होने का अनुमान)। |
| गूगल डेटा सेंटर्स (2022) | 2.12 करोड़ क्यूबिक मीटर (560 करोड़ गैलन) पानी | स्थानीय समुदायों में जल संकट और तनाव का कारण। |
| माइक्रोसॉफ्ट (2022) | 64 लाख क्यूबिक मीटर पानी | डेटा सेंटर्स को ठंडा रखने के लिए भारी जल खपत। |
3. ई-कचरा (E-Waste) और विकासशील देशों पर प्रभाव
2010 से 2022 के बीच आईटी उपकरणों और स्क्रीन से निकलने वाला कचरा 30% बढ़कर 1.05 करोड़ टन तक पहुंच गया है।
विकासशील देश (जैसे अफ्रीका, जिसके पास दुनिया के 55% कोबाल्ट और 47.6% मैंगनीज के भंडार हैं) इस संकट का सबसे ज्यादा खामियाजा भुगत रहे हैं। वे सस्ते कच्चे माल का निर्यात करते हैं, लेकिन महंगे उपकरणों का आयात करने और अनुचित ई-कचरे के निस्तारण से स्वास्थ्य व पर्यावरणीय समस्याओं से जूझ रहे हैं।
समाधान और भविष्य की राह (UNCTAD के सुझाव)
सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy): इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की रिसाइक्लिंग और कीमती धातुओं के पुनर्चक्रण को प्राथमिकता देना।
अक्षय ऊर्जा में निवेश: डेटा सेंटरों और ब्लॉकचेन नेटवर्क को जीवाश्म ईंधन की जगह सौर और पवन ऊर्जा पर स्थानांतरित करना।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और नियमन: डिजिटल प्रौद्योगिकियों के उत्पादन और उपयोग के लिए सख्त पर्यावरणीय मानक लागू करना ताकि विकासशील देशों को खनिजों का उचित मूल्य और स्वच्छ तकनीक मिल सके।