ओडिशा में एएमए ई-राइड: महिला चालकों के सशक्तिकरण और पहली-आखरी छोर की कनेक्टिविटी की नई मिसाल
भुवनेश्वर में 13 फीडर रूटों पर चल रही समावेशी इलेक्ट्रिक रिक्शा सेवा; तय मासिक आय और सुरक्षित कार्य परिवेश के साथ चिकित्सा सुविधाओं व कम वेतन की चुनौतियां भी बरकरार।
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को पर्यावरण-अनुकूल, समावेशी और सुलभ बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई 'एएमए ई-राइड' (AMA e-Ride) सेवा महिला चालकों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। ओडिशा सरकार के आवास एवं शहरी विकास विभाग के तहत काम करने वाली सार्वजनिक परिवहन एजेंसी कैपिटल रीजन अर्बन ट्रांसपोर्ट (CRUT) द्वारा मई 2022 में शुरू की गई यह पहल देश में अपनी तरह का पहला सरकारी ई-रिक्शा बेड़ा है।
हरित परिवहन और समावेशी रोजगार का संगम
एएमए ई-राइड सेवा का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को उनके घरों से मुख्य बस स्टॉप (AMA Bus Stops) तक सस्ती और सुलभ 'फर्स्ट-एंड-लास्ट माइल कनेक्टिविटी' प्रदान करना है।
आरक्षित रोजगार: इस सेवा के तहत ई-रिक्शा चालकों (जिन्हें 'सारथी' कहा जाता है) के सभी पद महिलाओं, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों के लिए आरक्षित हैं।
समान किराया व्यवस्था: यात्रियों की सुविधा के लिए इसमें 10 रुपये प्रति सवारी का एक समान (Flat) किराया रखा गया है।
प्रमुख रूट: वर्तमान में भुवनेश्वर में 13 फीडर रूटों पर यह सेवा संचालित है, जिनमें केआईआईटी स्क्वायर (KIIT Square), इन्फोसिटी, एसयूएम अस्पताल, एआईआईएमएस (AIIMS) अस्पताल, पोखरीपुट, आईटीईआर और दमाना स्क्वायर जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
आजीविका में सुधार बनाम ज़मीनी चुनौतियाँ
एएमए ई-राइड से जुड़ी महिला चालकों (जैसे सबिता भोई और संजुक्ता डागर) के अनुसार, इस नौकरी ने उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता, निश्चित मासिक आय (₹15,500) और 8 घंटे की सुरक्षित दिन की शिफ्ट दी है। हालाँकि, इस सेवा से जुड़ी कुछ प्रमुख चुनौतियाँ भी सामने आई हैं:
| सकारात्मक पहलू | विद्यमान चुनौतियाँ |
|---|---|
| निश्चित आय: ₹15,500 का तय मासिक वेतन (सवारी संख्या की बाध्यता नहीं)। | सीमित अवकाश व कटौती: महीने में केवल 4 दिन का सवेतन अवकाश; अतिरिक्त छुट्टी पर वेतन कटौती। |
| सुरक्षित कार्य परिवेश: रात की शिफ्ट से मुक्ति और हुक्म चलाने वाले बॉस से आज़ादी। | चिकित्सा सुविधाओं का अभाव: स्वास्थ्य बीमा, ईएसआई या अन्य चिकित्सा भत्ते उपलब्ध नहीं। |
| कौशल विकास: 3 महीने का ड्राइविंग और सॉफ्ट-स्किल प्रशिक्षण। | शारीरिक तनाव: लगातार ड्राइविंग से पीठ और घुटनों के दर्द की समस्या। |
CRUT के प्रबंध निदेशक मोहम्मद सादिक आलम के अनुसार, 50 ई-रिक्शों से शुरू हुए इस बेड़े में से फिलहाल 38 ई-रिक्शा परिचालन में हैं, जबकि शेष रखरखाव और कर्मचारियों की कमी के कारण खड़े हैं।
पुरी मॉडल बनाम भुवनेश्वर: विकेंद्रीकृत निजी ऑपरेटर
भुवनेश्वर के केंद्रीकृत सरकारी मॉडल के विपरीत, तीर्थ नगरी पुरी में ई-रिक्शा व्यवस्था अधिक विकेंद्रीकृत और निजी यूनियनों (जैसे स्थानीय आश्रमों से जुड़ी यूनियनों) द्वारा संचालित है:
पुरी में निजी चालक (उदा. पी. राकेश बेहरा) रोजाना ₹1,500 से ₹2,000 तक की कमाई करते हैं।
पुरी में 12 से 15 ई-रिक्शा यूनियनें काम कर रही हैं, जहाँ किराया दूरी और सीजन (जैसे प्रसिद्ध रथ यात्रा) के आधार पर ₹20 से ₹100 तक रहता है।
भविष्य के विस्तार की योजनाएं और ईवी पंजीकरण
ओडिशा में इलेक्ट्रिक वाहनों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के वाहन डैशबोर्ड (Vahan Dashboard) के आंकड़ों के अनुसार:
2025-26 में राज्य में ई-रिक्शा का पंजीकरण बढ़कर 6,901 हो गया, जो पंजीकृत कुल 92,364 इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया वाहनों का 7.5% है।
आगे की राह: CRUT अब एएमए ई-राइड को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विस्तारित करने की योजना बना रहा है। इस सेवा को संबलपुर के बाद अब राउरकेला, कटक, क्योंझर, अंगुल, झारसुगुड़ा, भद्रक, बालासोर और बारीपदा जैसे शहरों में स्थानीय मांग के आधार पर शुरू किया जाएगा।