विकसित ग्राम से समृद्ध भारत: ‘ग्रामोदय से राष्ट्रोदय’ सम्मेलन में ग्रामीण विकास का नया रोडमैप
सहकारी संघवाद, नई योजनाओं और डिजिटल क्रांति के बल पर बदलेगी ग्रामीण भारत की तस्वीर और तकदीर
नई दिल्ली के पूसा परिसर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन ‘ग्रामोदय से राष्ट्रोदय’ के समापन सत्र में देश के ग्रामीण परिदृश्य को बदलने के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 29 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों और वरिष्ठ नीति-निर्माताओं के साथ गहन मंथन किया। यह आयोजन ‘सहकारी संघवाद’ का उत्कृष्ट उदाहरण बना, जहां राजनीतिक भिन्नताओं से ऊपर उठकर ‘विकसित ग्राम-विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने की ठोस रणनीतियां बनाई गईं।
संबोधन के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गांव केवल धूल-मिट्टी या चौपाल का नाम नहीं, बल्कि भारत की शक्ति, चेतना और आत्मा हैं। गांव की प्रगति के बिना देश का समग्र विकास असंभव है।
सम्मेलन के मुख्य बिंदु और प्रमुख घोषणाएं
‘विकसित भारत- जी राम जी’ योजना का शुभारंभ: मनरेगा का स्थान लेने वाली ‘विकसित भारत- जी राम जी’ (VB-G RAM G) योजना देशभर में लागू की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी योजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए 95,682 करोड़ रुपये की अंतरिम स्वीकृति दी जा चुकी है।
‘लखपति दीदी’ पहल का विस्तार:
सम्मेलन के दौरान ‘लखपति दीदी डैशबोर्ड’ और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं के लिए एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया।
लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ कर दिया गया है।
इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अगले 5 वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये का बैंक-लिंकिंग रोडमैप तैयार किया गया है।
प्रशासनिक सुधार और प्रभावी क्रियान्वयन:
वित्तीय प्रतिबद्धता: राज्यों को अपना बजटीय हिस्सा समय पर जारी करना होगा।
स्थिर कार्यकाल: अधिकारियों के बार-बार तबादलों से काम प्रभावित न हो, इसके लिए जिम्मेदार पदों पर अधिकारियों का कार्यकाल कम से कम 2 से 3 वर्ष तय करने का सुझाव दिया गया।
तकनीकी निगरानी: योजनाओं में पारदर्शिता के लिए AI-आधारित मॉनिटरिंग और सोशल ऑडिट व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
प्रमुख योजनाओं की समीक्षा व बेस्ट प्रैक्टिस:
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), ग्रामीण सड़क योजना और दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना की प्रगति की समीक्षा की गई। भूमिहीन लाभार्थियों को जमीन उपलब्ध कराने और लंबित आवासों को जल्द पूरा करने पर जोर दिया गया।
झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के सफल मॉडलों (जैसे मल्टी-चैनल मार्केटिंग और आजीविका ऋण योजनाएं) को अन्य राज्यों में भी दोहराया जाएगा।
जल संरक्षण और आपदा प्रबंधन: कम वर्षा की आशंका वाले 14 राज्यों को सतर्क रहने, जल संरक्षण संरचनाओं को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त रोजगार की पूर्व-तैयारी रखने के निर्देश दिए गए।
सहभागिता का नया मॉडल
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि ग्रामीण विकास का मूलमंत्र सहभागिता है—"केंद्र नीति बनाए, राज्य उसे लागू करें, पंचायत नेतृत्व करे और जनता सहभागी बने।"
सम्मेलन के अंत में ‘VB-G RAM G’ से जुड़ी प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया तथा ग्रामीण विकास के नए विचारों व नवोन्मेषी मॉडलों पर आधारित पुस्तकों का विमोचन भी हुआ।