निन्ह बिन्ह के प्रीस्कूलों में समावेशी शिक्षा और डिजिटल क्रांति: हर बच्चे के लिए समान अवसर
विकलांग बच्चों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने, AI और डिजिटल तकनीक के सही इस्तेमाल से शिक्षा में समानता लाने की अनूठी पहल
प्रीस्कूल (पूर्व-प्राथमिक) स्तर से ही विकलांग बच्चों के लिए अनुकूल सीखने का माहौल बनाना और डिजिटल विभाजन को पाटना एक ऐसी अनिवार्य आवश्यकता है, जो किसी भी समृद्ध समाज की नींव रखती है। शिक्षा में वास्तविक समानता का अर्थ हर बच्चे को एक समान सुविधा देना नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे की विशेष आवश्यकताओं, योग्यताओं और चुनौतियों को समझकर उन्हें सीखने और साथियों के साथ आगे बढ़ने के उचित अवसर प्रदान करना है।
वियतनाम के निन्ह बिन्ह प्रांत में प्रीस्कूल स्तर पर समावेशी शिक्षा और डिजिटल परिवर्तन को एकीकृत करने की दिशा में व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं।
समावेशी शिक्षा: "स्कूल जाने" से आगे "उचित शिक्षा प्राप्त करने" तक
समावेशी शिक्षा का मतलब केवल विकलांग बच्चों को सामान्य कक्षा में बैठा देना भर नहीं है। असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि बच्चा गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले सके और अपने साथियों के साथ सहजता से घुल-मिल सके।
व्यक्तिगत प्रोफाइल और योजना: निन्ह बिन्ह में सर्वेक्षण किए गए 442 विकलांग बच्चों में से 399 को समावेशी शिक्षा के योग्य पाया गया है। इनके लिए व्यक्तिगत प्रोफाइल और अनुकूलित शैक्षणिक योजनाएं तैयार की जा रही हैं।
शिक्षकों की दक्षता में वृद्धि: सत्र 2025-2026 के लिए निन्ह बिन्ह के शिक्षा विभाग ने प्रशासकों और प्रमुख शिक्षकों सहित 9,428 प्रतिभागियों के लिए 21 विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की रूपरेखा बनाई है।
व्यक्तिगत भिन्नताओं का सम्मान: हर बच्चे की शारीरिक, भाषाई या संज्ञानात्मक क्षमताएं अलग होती हैं। जब शिक्षक इन भिन्नताओं को समझते हैं, तो लक्ष्य केवल 'कक्षा में उपस्थिति' न होकर 'उचित शिक्षा' बन जाता है।
शिक्षा में तकनीक और AI का समावेश
स्मार्ट तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शिक्षकों के लिए शिक्षण सामग्री को समृद्ध और सुलभ बनाने में क्रांतिकारी भूमिका निभा रहे हैं।
शिक्षकों के नए मददगार: शिक्षक पाठ योजनाओं, कहानियों, चित्रों और इंटरएक्टिव खेलों को तैयार करने के लिए Copilot, Canva और AI उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं।
दृश्य और श्रव्य सहायता: भाषा या ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई का सामना करने वाले बच्चों के लिए विजुअल लर्निंग मटेरियल (दृश्य सामग्री) और ध्वनियाँ सीखने की प्रक्रिया को आकर्षक और सरल बनाती हैं।
संतुलन और मानव स्पर्श ज़रूरी: येन येन किंडरगार्टन की शिक्षिका सुश्री ट्रान थी थू हुआंग के अनुसार, "तकनीक केवल एक सहायक साधन है, यह शिक्षक और बच्चे के प्रत्यक्ष संवाद का स्थान नहीं ले सकती।" तकनीक का सीमित और उद्देश्यपूर्ण इस्तेमाल बच्चों को व्यावहारिक अनुभवों से दूर किए बिना उनकी सीखने की क्षमता बढ़ाता है।
डिजिटल परिवर्तन और प्रशासनिक पारदर्शिता
तकनीक का उपयोग केवल शिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि बाल देखभाल और प्रबंधन में भी इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है:
आहार और पोषण प्रबंधन: निन्ह बिन्ह के सभी 458 प्रीस्कूल और 456 निजी किंडरगार्टन मेनू तैयार करने, भोजन की मात्रा की गणना और पोषण स्तर की निगरानी के लिए विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे हैं।
डिजिटल विभाजन को पाटने की चुनौती: ग्रामीण, पर्वतीय और पिछड़े क्षेत्रों में इंटरनेट व स्मार्ट उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक चुनौती है। सरकार का मुख्य ध्यान इन दूरस्थ इलाकों के स्कूलों को प्राथमिकता के आधार पर संसाधन उपलब्ध कराने पर है, ताकि डिजिटल अंतर को समाप्त किया जा सके।
निष्कर्ष
समावेशी शिक्षा और डिजिटल तकनीक दोनों का मूल सिद्धांत एक ही है—शिक्षार्थी की आवश्यकताओं को केंद्र में रखना। शिक्षा में वास्तविक समानता का मापन केवल छात्रों की संख्या से नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे को दिए जाने वाले समर्थन और विकास के अवसरों से होता है। निन्ह बिन्ह का यह मॉडल दर्शाता है कि यदि संवेदना और तकनीक एक साथ आएं, तो हर बच्चे के लिए एक उज्ज्वल और समावेशी भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।