कौशल विकास पर संसदीय समिति की चिंता: PMKVY 3.0 में मात्र 7% युवाओं को ही मिल सका रोजगार
अरबों के बजट और लाखों प्रमाण पत्रों के बावजूद निराशाजनक प्लेसमेंट दर; योजना के चौथे चरण से पहले उठे गंभीर सवाल।
केंद्र सरकार भले ही 'प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना' (PMKVY) के चौथे चरण की तैयारियों में जुटी है, लेकिन इसके पिछले चरणों के नतीजे बेहद चिंताजनक सामने आए हैं। श्रम, कपड़ा एवं कौशल विकास मामलों की स्थायी संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार, योजना के तीसरे चरण (PMKVY 3.0) के तहत प्रशिक्षित और प्रमाणित युवाओं में से केवल 7 प्रतिशत को ही नियुक्ति/रोजगार मिल सका है।
समिति ने आवंटित बजट का पूरा उपयोग न हो पाने और प्रशिक्षण के बीच में ही युवाओं द्वारा कोर्स छोड़ने (Drop-out) की बढ़ती दर पर भी कड़ा रुख अपनाया है।
प्रशिक्षण बनाम रोजगार: आंकड़ों का सच
संसदीय समिति द्वारा प्रस्तुत आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि युवाओं को कौशल प्रदान करने और उन्हें वास्तविक रोजगार से जोड़ने के बीच एक बड़ा अंतर बना हुआ है:
| योजना का चरण | प्रमाणित उम्मीदवार | रोजगार पाने वाले उम्मीदवार | सफलता/प्लेसमेंट दर |
|---|---|---|---|
| PMKVY 2.0 | 91,38,665 | 21,32,715 | 23% |
| PMKVY 3.0 | 3,99,860 | 30,599 | 7% |
नोट: PMKVY 3.0 के तहत 8 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन कोविड-19 महामारी व अन्य कारणों से केवल आधे युवाओं को ही प्रमाण पत्र दिए जा सके।
बजट के कम उपयोग और 'ड्रॉप-आउट' की चुनौती
रिपोर्ट में केवल रोजगार की कमी ही नहीं, बल्कि वित्तीय प्रबंधन और युवाओं के जुड़ाव से जुड़ी कमियों को भी उजागर किया गया है:
अव्यवहृत बजट: वित्त वर्ष 2021-22 में PMKVY 3.0 के लिए 1,438 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन वास्तविक खर्च केवल 1,043.21 करोड़ रुपये ही हो सका। इसी तरह अगले वित्त वर्ष में भी जारी राशि का एक बड़ा हिस्सा बिन इस्तेमाल रह गया।
20% युवाओं ने छोड़ा कोर्स: योजना के तीनों चरणों के दौरान कुल नामांकित उम्मीदवारों में से लगभग 20 प्रतिशत ने प्रशिक्षण बीच में ही छोड़ दिया।
कोर्स छोड़ने के मुख्य कारण (IIPA अध्ययन के अनुसार): भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) की रिपोर्ट के मुताबिक कौशल में सुधार न दिखना, घर से केंद्रों की दूरी, पारिवारिक/सामाजिक समस्याएं और स्वास्थ्य कारण इसके मुख्य जिम्मेदार रहे।
भविष्य की राह: संसदीय समिति की सिफारिशें
संसदीय समिति ने कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) को सख्त निर्देश दिए हैं कि PMKVY 4.0 की शुरुआत से पहले इन सभी नीतिगत और व्यावहारिक बाधाओं को दूर किया जाए।
समिति का स्पष्ट कहना है कि केवल प्रमाण पत्र बांटना काफी नहीं है; योजना की सफलता तभी मानी जाएगी जब आवंटित बजट का शत-प्रतिशत सही उपयोग हो और प्रशिक्षित उम्मीदवारों के लिए गारंटीकृत प्लेसमेंट तथा स्वरोजगार के अवसरों में बड़ा सुधार दर्ज किया जाए।